आपकी सोच ही आपकी जीवन विधाता है,
यही वो सूत्र है, जो भाग्य को जगाता है।
न कोई ग्रह-नक्षत्र, न कोई लकीर हाथ की,
सोच ही तय करती है, सीमा हर बात की।
जैसा भाव मन में है, वैसी ही सृष्टि है,
सोच अगर सुंदर हो, तो पावन हर दृष्टि है।
दुखों के अंधेरे में भी, जो उम्मीद सजाता है,
वही तो अपनी राह का, सूरज बन जाता है।
गिरे हुए को उठा दे, या उड़ते को गिरा दे,
सोच चाहे तो मिट्टी को भी, सोना बना दे।
दुनिया का हर मंजर, बस एक आईना है,
अपनी ही सोच को, बस खुद ही पहचाना है।
कठिन रास्तों पर भी जो, खिलखिलाता है,
वो अपनी तकदीर, खुद ही लिखता जाता है।
याद रखना यह सच, जो जग को भाता है,
आपकी सोच ही आपकी जीवन विधाता है।
....... सर्वेश दुबे
१५/०१/२०२६

