Saturday, September 26, 2009

आपका दशहरा,

आपका दशहरा,
हो प्यार से हरा भरा
खुशियो से युक्त रहे,
दु:ख ना हो जरा
प्रगति के नये सोपान लि्खो
धन सम्प्दा से युक्त दिखो
इस धरा पे तुम कर दो कुछ नया
हर दिशा मे तेरा नाम हो बँया
अपका दशहरा, हो प्यार से भरा
खुशियो से युक्त रहो, दु:ख ना हो जरा

---सभी को विजयादशमी के गर्व भरे पर्व पर मेरी तरफ़ से हार्दिक शुभकामनाये -------

Tuesday, September 22, 2009

नेता - देश को गडडे मे धकेलता ---

चुनाव के समय
आप बहुत नम्र दिखते है
आप बहुत विनम्र दिखते है
अरे मै तो भूल गया था
की आप नेता है ----------,
आप संसद मे प्रश्न उठाते
बदले मे पैसे कमाते
आप तो पीठ मे छूरा
भोकने मे उस्ताद है
अरे मै तो भूल गया था
की आप नेता है------------

अरे आज जिनके आगे
वोटो के लिये सर झुकाते है
चुनाव जितने के बाद आप उनको
तबियत से धकियाते है
अरे मै तो भूल गया था
की आप नेता है,----------

पहले आप एक दुसरे पर संसद मे माईक
और कुर्सी खींच कर मारते है
आज आप कुर्सी के लालच मे एक दुसरे
की दोस्ती कि डींगे हाकते है
अरे मै तो भूल गया था
की आप नेता है,----------

ऐसे लोग देश को चला रहे है
देश पे मर मिटने वाले शहीदों के
अरमानो को जला रहे है

हे प्रभो ! नही नही हे जनता !
आप ही इस देश को बचा सकते है
देश के गद्दारो को सबक सिखा सकते है

मँहगाई और तनख्वाह

मँहगाई और तनख्वाह
एक बहुत आगे एक बहुत पीछे

आइये मँहगाई पे कुछ चित्र खीचें

दिन मे दिखाये ये सबको तारे
जिससे परेशान सभी है बेचारे

मँहगाई की पीछा जो कभी ना कर पाये
वही महीने की तनख्वाह कहलाये

कुछ समय बाद किलो मे, वस्तुओ
को खरीदना स्वप्न हो जायेगा
10 ग्राम घी खरीदने के लिये भी बैक
सस्ते दर पे कर्ज उपलब्ध करवायेगा

महिने के लिये घर का राशन
तौल कर नही गिन कर आयेगा
आने वाले समय मे आदमी अपनी
जेबे बडी और झोला छोटा सिलवायेगा


मँहगाई की परिभाषा,
ये कभी कम हो होगा, मत
करना ऐसी मूर्खतापूर्ण आशा


एक तरफ़ गडढा एक तरफ़ खाई
इस कहावत का नया रूप होगा
एक तरफ़ तनख्वाह एक तरफ़ मँहगाई

शादी के विग्यापन कुछ इस तरह
आवश्यकता है – वर की -------,
ब्राह्मण हो या चाहे हो कसाई
पछाड सके उसको जिसको कहते है मँहगाई