Tuesday, July 27, 2010

ह्र्दय, तडप और प्यास कविता का अहसास

सोचता था कवि बनूगा
सरल सहज शब्दो को लेकर
ह्र्दयस्पर्शी कविता गडूगा
खुब तलाशे शब्द मैने, पढी
खुब कविताये
कुछ तो हम खुद समझ गये
कुछ वक्त ने समझाये
शब्दो का भन्डार अनुपम
गर्व से मै भर गया
उत्कृष्ट शब्दो से कविता
को मैने भर दिया
शब्द ग्यान के गर्व ने
कविता को नीरस कर दिया
ना दे सका आकार स्वप्न को
जो बचपन मे मैने थे बनाये
ह्र्दय तो खण्डित हो चुका
रात भर अश्रु बहाये
गर्व तो अब मर चुका था
तब मन को हुया अह्सास
कबिता को गुनने के लिये
हो ह्र्दय, तडप और प्यास
-सर्वेश -

2 comments:

Anonymous said...

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Anonymous said...

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