इस दुनिया में मेरा दिल भी एक मुल्क है
इसकी कुल और कुल आबादी सिर्फ तू है।
नक़्शे में दर्ज़ नहीं ये सरहदें मेरी,
मेरी हर हद, हर आज़ादी सिर्फ तू है।
यहाँ क़ानून नहीं, एहसास चलते हैं,
मेरी हर एक अदालत की गवाही सिर्फ तू है।
तेरी ख़ामोशी से लगता है कर्फ़्यू यहाँ,
मेरी हर इक बग़ावत की वजह सिर्फ तू है।
शहर वीरान लगे, अगर तू न दिखे,
मेरी हर एक रौनक में सिर्फ तू है।
न तख़्त चाहिए, न ताज, न हुकूमत कोई,
मेरी हर एक सल्तनत की बुनियाद सिर्फ तू है।
यहाँ जंगें नहीं होतीं, बस इंतज़ार रहता है,
मेरी हर एक जीत, हर इक शिकस्त सिर्फ तू है।
मेरे हर ख़्वाब की ताबीर में तू ही तू,
मेरी हर एक दुआ की इबादत सिर्फ तू है।
अगर पूछे कोई मुझसे मेरी पहचान क्या है,
मेरी हर एक कहानी की पहचान सिर्फ तू है।
दुनिया चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो जाए,
मेरे इस छोटे से दिल की पूरी कायनात सिर्फ तू है।
.....सर्वेश दुबे


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